अमृत बरस रहा (संकलित हिन्दी भजन )

अमृत बरस रहा

(संकलित हिन्दी भजन )

मन अमृत बेला जाग, अमृत बरस रहा ।

मन परभु चिन्तन में लाग, अमृत बरस रहा ।।

नीरस जीवन में रस भर ले, धरर्म धार भवसागर तर ले ।

आलस निद्रा त्याग, अमृत बरस रहा ॥ मन….

सत्य ज्ञान की ओढ चुनरिया, छोड कपट चल परेमनगरीया ।

धो कुसँग के दाग, अमृत बरस रहा ॥ मन…..

परउपकार को लक्ष्य बना ले, उँचा अपना आप उठा ले ।

तज मिथ्या अनुराग, अमृत बरस रहा ॥ मन….

बडे भाग्य यह नर तन पाया, सँत जनों ने यही बताया ।

रख ईसको बेदाग, अमृत बरस रहा ॥ मन…..